अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ एक नज़र में
अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ ने देश के सर्वहारा समाज को साथ लेकर गौ माता की रक्षा हेतु जमीनी स्तर पर अभियान चलाये। संगठन 28 राज्यों में सक्रिय है और समय-समय पर केंद्र व राज्य सरकारों को प्रतिवेदन/प्रस्ताव भेजता आया है।
विस्तृत उद्देश्य:
🌟 गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना। 
🌟 गौ हत्या पर पूर्ण रोक और सख्त कानून पारित कराना।
🌟 गौशाला, नंदीशाला व आश्रय-स्थलों का जाल बनाना।
🌟 गो-उद्योग: गोबर/गोमूत्र से रोजगार सृजन।
🌟 जनजागरण — सभी धर्मों में गौ-संस्कृति का प्रसार।
🌟 राज्य व केंद्र में नीति-प्रभाव के लिये लगातार पत्राचार और आंदोलन।
- अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ का गठन राष्ट्र निर्माण जन सेवा गौरक्षा के संवर्धन सुरक्षा तथा समाज में व्याप्त कुरीतिया के समाप्त करने के उददेश्य से दिनांक 27-09-2017 को लखनऊ में किया गया तथा तभी से लेकर आज तक पुरे देश मे गोमाता रक्षा सुरक्षा सर्वधन के लिये सर्वहारा समाज को साथ लेकर संगठन जमीनी स्तर पर देश में आपके सहयोग से काम कर रहा है जो हम सब के लिये गर्व का विषय है।
- अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ का गठन होने के बाद राजधानी दिल्ली में एक अति आवश्यक बैठक आहूत की गई थी जिसमे संस्था के संस्थापक सहित सदस्यों सहित देश के कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और तय हुआ कि अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ मुख्य बिन्दुओं पर भारत सरकार व राज्य सरकारों को मांग पत्र ज्ञापित करें ताकि गौ रक्षा जमीनी स्तर पर हो सकें इस संदर्भ राष्ट्रपति भारत सरकार प्रधानमंत्री भारत सरकार तथा देश के सभी के सभी राज्यो के मुख्यमंत्रीयो को मांग पत्र भेजते हुए कहा कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए गौ रक्षा सुरक्षा सर्वधन हेतू पूरे देश गौशाला गौ होस्टल मोबाइल डिसपेंसरी वैन चलाई जाए ताकि किसी भी स्थिति में गौ रक्षा की जा सकें साथ ही सडकों पे घुमने वाली गौ माता कूडे से गन्दगी प्लास्टिक आदि खाकर बीमार की हालत में दम तोड देती है उस पर पुरी तरह अंकुश लगाया जाये तथा गौपालको को चिन्हित कर गौमाता को गाऊशाला आश्रम स्थल पर रहकर जीवन यापन करने की व्यवस्था हो और लावारिस गाय को तत्काल आश्रय स्थल भेजा जाये। इस पर केंद्र व राज्य सरकारों ने सार्थक पहल की है।
- अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ की मांगो को केंद्र व राज्य सरकारो ने गम्भीरता पूर्वक लिया तथा गौ रक्षा के लिये सार्थक पहल प्रधानमंत्री जी के द्वारा की गयी और सरकार ने 160 करोड रूपये का बजट पारित करते हुए छुटटा पशुओं को ससम्मान गौशाला भेजने आश्रय स्थल बनाये जानें को बजट जारी किया साथ ही उत्तराखण्ड, हिमाचल, राजस्थान एवं उत्तर-प्रदेश राज्य में गौमाता को दर्जा प्रदान किया गया और अन्य राज्यों में भी सार्थक परिणाम सामने आ रहे है जो संगठन के लिये हर्ष का विषय है।
- अखिल भारतीय गौरक्षा महासंघ की प्रथम राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सभा में निर्णय हुआ था कि गौमाता की रक्षा सुरक्षा के संरक्षण गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाते हुए गौ हत्या करने वालों को मृत्यु दण्ड का प्रविधान होना चाहिए जिसके लिए आज पुनः मांग की जाती है।
- गौ हत्या के नाम पर किसी का उत्पीडन ना हो इसके लिए गौवंश बैचने खरीदने वालों से लिखित प्रमाण लेकर काम हो और लिखित पत्र दोनों पक्षों के पास हो ताकि चेकिंग के दौरान अकारण परेशानी व उत्पीडन से बचा जा सकें।
- प्राय देखा गया है कि वाहनों में जो पशु आते जाते है अकारण परेशान किया जाता है और भीड़ का जमावडा होने से स्थिति नियन्त्रण में नही रह पाती जिस कारण शान्ति व्यवस्था को खतरा होता है इसके लिए शासन में मानक निर्धारित है जिनके अनुसार व्यवस्था को सुचारू रूप दिया जा सकता है इसमें गोकशी पर नियंत्रण हेतु पशु परिवहन अधिनियम धारा 1860 के अर्न्तगत केवल गौवंश को वाहनों में आवाजाही करने दी जाए और पुरी स्थिति स्पष्ट हो ।
🌟 गौवंश लदा वाहन में एक से अधिक गौवंश न हो यदि हो तो वह नियम का विरुद्ध है।
🌟 वाहन में दुधारू गौवंश या गर्भवती गौवंश है तो उसे अकारण परेशान न किया जाए ऐसी स्थिति में मानवीय दृष्किोण अपनाया जाए।
🌟 जब्तशुदा गौवंश को स्थानीय पशुपालक या गौशाला कि सपुदंगी में दिलाया जाना सुनिश्चित हो तथा पुर्ण विवरण दोनों पक्षों के पास हो।
🌟 गौवंश शव विच्छेदन राजकीय पशु चिकित्सा अधिकारी के द्वारा सत्यपित होने के बाद किया जाए ताकि वास्तविकता सामने हो कि गौवंश बिमार था या भूख प्यास से मर गया।
🌟 किसी भी दशा में गौवंश की खाल न निकलने दे और गौवंश को सम्मान सहित दफनाया जाए
- उत्तराखण्ड राज्य के मुख्य मंत्री को मांगा पत्र प्रेरित किया गया था जिसके परिणाम रूवरूप उत्तराखण्ड राज्य में भी गौ माता को दर्जा प्रदान किया गया है।
- अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ 28 राज्यों में मजबूती के साथ काम करता आ रहा है तथा उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड गुजरात मध्य प्रदेश दिल्ली छत्तीसगढ़ में राज्य सम्मेलन हो चुके है। बाकी राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद प्रारम्भ किये जाएगें।
- अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ पूरे देश में जन जागरण अभियान चलाते हुए मुस्लिम समाज के बीच जाकर कुरान की रोशनी में गौमाता के बारे में बताने का काम करेगा तथा मुगलकाल के आदेश भी बताने का काम करेगा क्योंकि गौहत्या किसी भी रूप में मान्य नहीं है साथ ही तथा कथित उन लोगों को की बेनकाब करेगा जो धर्म की आड़ में गौ हत्या को बढावा देते।
- राष्ट्रीय अधिवेशन के माध्यम से विशेष अनुरोध है कि संगठन के सभी पदाधिकारी अपने नाम पद की पट्टिका (नेमप्लेट) अपने वाहनो मकानों दुकानों पर लगाये तथा संगठन का झंडा भी लगाऐं साथ ही अपने क्षेत्रो में प्रमुख स्थानों पर फलेक्स बोर्ड आदि लगाकर अपना परिचय व संगठन का परिचय जनमानस को दें
- राष्ट्रीय अधिवेशन का समाचार फोटो सहित अपने अपने क्षेत्रो में जाकर प्रकाशित कराये ताकि जनमानस मे संदेश जाए।
प्रस्ताव
अखिल भारतीय गौ राक्षा महासंघ का पाचवा राष्ट्रीय अधिवेशन ऋषिकेश उत्तराखण्ड देव भूमि में आज सम्मपन्न हो रहा है और यह अधिवेशन कई मामलों में महत्वनपूर्ण साबित होगा क्योंकि जीवन दायिनी माँ गंगा गौ मुख से निकल कर अपनी अविरल धारा को छूकर अधिवेशन स्थल के तट पर बहती जा रही है और माँ गांगा के तट पर गौ रक्षा महासंघ का अधिवेशन होना तथा आप सभी का इस क्षण उपस्थित होना भी इस बात का प्रमाण है कि हम सभी गौ गंगा के लिए एक मत है।
- यह आदेश इसलिए भी अति महत्वपूर्ण है कि में गांगा का उदगम गंगोत्री के पास गौमुख से हुआ जो भागीरथी नदी के नाम से जाना जाता है, भागीरथी अलकनन्दा देव प्रयाग में आकर मिलती है और दोनों नदियों के मिलन के बाद माँ गंगा जो बनती है साथ ही गंगा जी ने मन्दाकनी अलकनन्दा देव प्रयाग में आकर मिलती है और दोनों नदिया गंगा जी में आकर सत्यानी अलकनन्दा का उदगम प्रमुख तीर्थ स्थल श्री बद्रीनाथ धाम में होता है।
- गौ संस्कृति भारत में आर्य साहित्य गौ महिमा से भरा हुआ है इसलिए देव भूमि में राष्ट्रीय अधिवेशन की अपनी महत्ता हो गई है।
- गौ माता के शरीर में 33 करोड़ देवी देवताओं के वास का वर्णन है और यह देवी देवता अधिकतर देव भूमि में वास करते है। तथा चार धाम भी देव भूमि में इसलिए राष्ट्रीय अधिवेशन की महत्ता और अधिक हो जाती है।
- ऋषिकेश उत्तराखण्ड देव भूमि में का स्वर्ग द्वार है जहाँ देवी देवताओं का वास है तथा माँ गंगा की स्वच्छ, निर्मल धारा हुई राम लक्ष्मण झूले को निहारती है तथा नीलकंठ धाम आम जन का सम्मोहन करते है।
- गौमाता हमारी सर्वोपरी श्रद्धा का केन्द्र है तथा भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और वैदिक काल से ही गौ माता भारतीय धर्म सभ्यता एंव अर्थव्यवस्था की आधार शिला रही है और भारत में सदैव गौधन को श्रेष्ठतम धन माता जाता राष्ट्रवर्धनमर:।
- अखिल भारतीय रक्षा महासंघ अपनी स्थापना से ही गौ रक्षा सुरक्षा संवर्धन के लिये देश भर में कार्य करता आ रहा है। तथा समय-समय पर केन्द्र व राज्य सरकारों को प्रस्ताव बनाकर प्रेरित करता है जिसके सार्थक परिणाम सामने आए है और काफी हद तक गौ हत्या पर अंकरा लगा है और गोशाला तेजी से खोली जा रही है लेकिन अभी भी मूलभूत ढंग से नौ संरक्षण नहीं हो पा रहे है।
- गौशालाओं को खोलकर उनको विकसित करने की दिशा में सार्थक कदम उठाते हुए गाय माता के गोबर से मच्छर मारने धूप बत्ती वर्तन माझने का पाउडर दंज मंजन आदि बनाकर सस्ता सुलभ कार्य केन्द्र व राज्य सरकारे और विकास योजनाओं के माध्यम से इसे जोड़कर सीधे आम जनता से गौ माता को जोड़ा जाये ताकि गौ की कुटिर उद्योग को बढ़ाव मिल सके।
- गौ माता के गोबर से खेतों में पैदा होने वाली फसल शुद्ध होती है तथा महंगी रासायनिक खाद दवाई महंगी व नुकसान देय है इसलिए गोबर गौ मूत्र को रोजी रोटी में जोड़ा जाए ताकि गौ रक्षा हो सकें।
- शहरों में आवारा घूमने वाली गो माताओं को स्थानीय स्तर पर चिहिन्त कर उन्हें आश्रय स्थल में रहने की व्यवस्था कराई जाए ताकि कूड़े की गंदगी खाकर गौ माता बीमार होने से बच सके शहरों में आवारा घुमने वाली गौ माताओं को स्थानीय स्तर पर चिहिन्त कर उन्हें आश्रय स्थल में रहने की व्यवस्था कराई जाए ताकि कूड़े की गंदगी खाकर गौ माता बीमार होने से बच सके
- नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में गौ पालको को चिहिन्त कराया जाए ताकि दूध देती गाय का मालूम हो सकें और वह कटान से मुक्त रहे।
- एम्बूलेंस की तरह सड़क पर बीमार मृतक गाय को पशु चिकित्सालय ले जाने की व्यवस्था हो तथा मृतक गाय को स्थानीय स्तर पर दफनाया जा सके
- गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाये जाने के लिये संगठन हर वर्ष 7 नवम्बर को जंतर मंतर पर विशाल धरना देकर मांग करता है, कि गौ माता को तत्काल राष्ट्र माता का दर्जा दिलाया जाए और 7 नवम्बर को गौ प्रेरणा दिवस घोषित किया जाए, क्योंकि दिन 7 नवम्बर 1966 को दिल्ली में गौ वध बंदी की मांग को लेकर स्वः कारपात्री महाराज के नेतृत्व में लाखों गौ भक्तों ने संसद का घेराव करते हुए यही मांग की थी जहां तत्कालीन सरकार ने गोलियां बरसाकर कायरता पूर्ण कार्य किया था। राज्य सरकारे गौ सेवा आयोग के माध्यम से गौ सेवक नियुक्त करें ताकि जिला नगर ग्राम स्तर पर सीधे जन संवाद हो सके। गौ-माता की रक्षा सुरक्षा संवर्धन के लिये जो भी कठोर नियम हो वह लागू किये जाये हम सभी यह मांग करते है।
गौ संरक्षण एवं संवर्धन से रोजगार
भारत के सास्कृतिक और सामाजिक ताने बाने में कृषि प्रधानता और पशुधन की परिकल्पना प्राचीन समय से ही नहीं है। किसी भी समाज में खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि उत्पाद और पशुधन उत्पाद की उपलब्धता आवश्य मानी जाती है इसे हम भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखे तो पता चलता है कि ग्रामीण भारत में कृषि के साथ-साथ पशुपालन की परम्परा समानन्तर ढंग से चलती है। वैदिक ग्रंथों के अनुसार गौ माता के शरीर में 33 करोड देवी देवताओं का वास माना जाता है और इससे उत्पन्न होने वाले दूध, मूत्र तथा गोबर किसी ना किसी देवी देवता के सानिध्य से होकर गुजरते है मान्यताओं के अनुसार गोबर में लक्ष्मी, गोमूत्र में गंगा तथा दूध सरस्वती का निवास है इसलिए कहा जाता है कि गौ दूध के सेवन से बुद्धि तीव्र होती है और गौ दूध में सोम दही में वायु गोबर में अग्नि तथा गौ मूत्र में वरूण देव का निवास माना गया है। अतः गौ माता का दूध मूत्र व गोबर दिव्य शक्तियो वाले माने जाते है ऋग्वेद के 1-22-14 वे मंत्र में यह उपदेश मिलता है कि गौ दुग्ध और घृत को बुद्धिमान लोग प्रयोगा करते आ रहे है।
गौ माता हमारी सर्वोपरि श्रद्धा का केन्द्र और भारतीय संस्कृति का प्रतीक है तथा वैदिक काल से ही गाय भारतीय संस्कृति धर्म सभ्यता एवं अर्थव्यवस्था की आधारिकता रही है और सदैव से ही गौ धन को श्रेष्ठतम धन माना जाता आ रहा है यानी गौधन राष्ट्र वर्धनम सम्पूर्ण राष्ट्र व विश्व की खुशहाली एंव सुख-समृद्धि गौ माता से जुडी हुई है इसलिए कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए हमें जनमानस को जागना होगा। राष्ट्र धर्म निभाना होगा ताकि गौ माता की रक्षा सुरक्षा सवर्धन के साथ-साथ गौ माता को रोजी रोटी से जोडा जा सकें।
- गाय गोबर गौ मूत्र से बनने वाले खाद एंव कीट नियंत्रण का प्रयोग से धरती धन्य से भर जाती है उसकी उर्वरक शक्ति बढ़ती है और गौवंश से प्राप्त गोबर सोने की खान माना गया है क्योंकि गौ गोवर कम समय कम लागत में फसल और खेत के लिये संजीवनी है।
- गौ माता जहां एक ओर दुग्ध का भण्डार है वही देश को आत्मनिर्भर बनाने हेतु जैविक कीट नियंत्रक का प्राकृतिक कारखाना है वही दूसरी और पंचगव्य औषधियां का अवगुण औषद्यालय है बल्कि यह कहा जाए कि गाय एंव गौवश हमारी अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है गो मूत्र हमारी पूंजी है इसे सहज कर सदुपयोग करने की आवश्यकता है।
- गोबर एंव गोमूत्र का औद्योगीकरणः आज रासायनिक खादों एवं कीटनाशक दवाओं से जीवन नर्क बन गया शरीर बीमारीयों का घर बन गया है जबकि हमारे दश में प्रचुर मात्रा में पशुधन है। पर्याप्त मात्रा में गोबर गोमूत्र उपलब्ध है। इसलिए हमें इसे रोज बनाना होगा। पशुपालन के व्यवसाय के साथ गोबर बोमूत्र से खाद व कीट नियन्त्रक के उत्पादन औषधियों के निर्माण एवं पचगव्य आधरित कुटीर उद्योगो की स्थापना कर गौशाला को विकसित करने की दिशा में सार्थक कदम उठाने की आवश्यकता है। गौ गोबर से मच्छर निरोधक क्वायल धूप बत्ती बर्तन मांझने का पाउडर तमंजन साबुन डिस्टेम्पर खपरैल विभिन्न भी किया जा सकता है। वही गौ मूत्र से मानव पशु उपयोगी औषधियों फिनाइल स्टीसाइड अन्न सुरक्षा टिकिया आदि का उत्पादक किया जा सकता है। वही गो मूत्र से मानव-पशु उपयोगी औषधियां, फिनाइल, पस्टीसाइड, अन्न सुरक्षा, टिकिया आदि का उत्पाद किया जा सकता है और मिथेन गैस सलैण्डर में भरकर रसोई, मोटर कार मे प्रयोग किया जा सकता है।
- गोमूल एक दिव्य औषधि है इसमें पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम क्लोराइड, यूरिया, फास्फेट, अमोनिया, क्रिएटिनिन आदि विभिन्न कैंसर जैसी घात बीमारियों में भी लाभकारी है। अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ गौ माता को रोजी रोटी से जोड़ने के लिये महा अभियान चलाते हुए जन मानस के बीच जाकर कहाना चाहता है कि जीवन को सुखी बनाओ दुखी नहीं। इसलिए गौ पालन को बढावा देते हुए उसका दूध, घी सेवन करें जो औषधि है, गो गोबर का प्रयोग खेती में करें साथ ही गोबर से कूड़ादान, कुल्हड़, दीये, गोबर, कांडी जो खाना बनाने अन्तयेष्ट पर लकडी नही गौ कांडी का प्रयोग करने से सस्ता पडेगा और वायु प्रदूषण जल प्रदूषण से भी मुक्ति प्राप्त होगी तथा सस्ता सुलभ कार्य कुटीर उद्योग, कोशल विकास के माध्यम से सीधे जन मानस को गौ माता को आस्था से जोडकर रोजी रोटी से भी जोड़ने का काम होगा।
हमारा सकल्प और उद्देश्य है कि आमजन स्वस्थ और सुखी जीवन व्यतीत करें इसलिए नकली महंगी दवाओं खाद्य पदार्थों से दूर रहकर हमें अपनी गौ प्रजातियों की रक्षा सवंर्धन करते हुए गौ दुग्ध, गौ मूत्र गोबर को बढ़ावा देना होगा महंगी व हानिकारक वस्तुओं से दूर रहकर सस्ता, सुलभ और सुखी जीवन का सपना देखकर भारत को विश्व गुरू बनाना होगा, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना होगा तथा गौ माता को आत्म जीवन में अपनाना होगा।
बेटा खाए थाली में माँ खाए नाली में यह नही होगा
- गौ रक्षा सुरक्षा एवं संवर्धन केलिये हमें जागरूक होना होगा क्योकि गौ माता जन्मी है इसकी सुरक्षा हमें पुत्र के रूप में करनी होगी।
- घर में बनने वाली पहली रोटी गाय माता को खिलाकर ही परिवार कुछ खाता था मगर आज सड़कों पर घूमती भूखी गाय कचरा गंदगी पोलिथीन खाने पर मजबूर है।
- आज अन्धाधुन्ध गौ हत्या हो रही है जबकि भारत का आर्थिक ढांचा गौ पालन पर निर्भर है क्योकि 70 प्रतिशत आबादी की आजीविक का स्रोत कृषि व्यवसाय है।
- गाय हमारी सर्वोपरि श्रद्धा का केन्द्र है तथा भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और वैदिक काल से ही गाय भारतीय संस्कृति, धर्म, सभ्यता एवं अर्थव्यवस्था की आधार शिला रही है और भारत में सदैव गौधन को श्रेष्ठतम धन माना जाता रहा है ” गौ धन राष्ट्र वर्धनम”।
- गाय के गोबर से गौ मूत्र से बनने वाली खाद से धरती धन्य होती है। गाय के गोबर से मिट्टी स्वस्थ रहती है भारी उपज देती है।
- गौशालाओं को खोलकर उनको विकसित करने की दिशा में सार्थक कदम उठाने होंगे क्योंकि गाय के गोबर से मच्छर मारने की क्यायल, धूप बत्ती, बर्तन मांझने का पाउडर दंत मंजन आदि बनाकर सस्ता सुलभ काम हो सकता है।
- पहले जमाने में गोबर से कच्चे मकानों में गोबरी होती थी जो कि भूकम्प कीड़े मकोड़े जहरीली चीजों से रक्षा करती थी।
- गौवर्धन पूजा गोबर से होती थी, त्योहारों पर से गोबर से सजावट होती थी।
- गौ मूत्र से मानव पशु उपयोगी दवाईयां बन रही हैं।
- गाय के गोबर से खेतों में पैदा फसल शुद्ध होगी और महंगी रासायनिक खाद, दवाई का खर्चा कम होगा तथा जमीन की ताकत बढ़ेगी और खेती उपजाऊ होगी।
- गाय के दूध का सेवन करने से गांजा, शराब, तम्बाकू, स्मैक, हीरोइन के प्रभाव को कम किया जा सकता हैं।
- दिल के रोग, कैंसर, मलेरिया, आँखों की रोशनी के लिये गाय का दूध लाभकारी है।
ज्ञान बिना मति नहीं गाय बिना गति नहीं
भारतवर्ष में आदिकाल से गौ माता को आस्था से देखा जाता है और जब से गौ माता की रक्षा, सुरक्षा, संवर्धन के लिये गौ सेवा में लगे संगठन सक्रिय हुए हैं तब से जन मानस में नई क्रान्ति का उदय हुआ है तथा मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ ने निरन्तर केन्द्र व राज्य सरकारों को पत्राचार करते हुए कहा है कि गौ माता को आस्था के साथ-साथ रोजी रोटी से भी जोड़ा जाए जिसके सार्थक परिणम सामने आए हैं और आज गौ मूत्र, गौ गोबर से आम जन मानस सीधे तौर पर रोजगार से जुड़ गया है। यह कारण है कि भारत वर्ष के साथ-साथ आज विदेशों विशेषकर इस्लामी देशों में भी गौ माता के लिये काम हो रहा है और सीधे रोजगार से गौ माता को जोडकर स्वस्थ जीवन के लिये भी तेजी से काम हो रहा है। आज भारत सहित विदेशों में भी जैविक खेती बहुत रास आ रही है। मुस्लिम बाहुल्य देश कुवैत के कृषि वैज्ञानिकों ने हाल ही में रिसर्च करते हुए दावा किया है कि खेती के लिये गाय का गोवर बेहद उपयोगी है। इसके बाद जयपुर राजस्थान के 192 मीट्रिक टन गोबर कुवैत भेजा गया है। साथ ही कुवैत भेजा गया है। साथ ही कुवैत के बाद शारजाह ने भी पाँच गुना गाय के गोबर की डिमांड हो गयी है।
जयपुर के प्रताप नगर स्थित श्री पिंजारापोल गौ शाला सनराइज रिसर्च सैंटर से 1000 मीट्रिक टन गोबर निर्यात हुआ है। वही राजस्थान के बाडमेट, जैसलमेर, टोंक, कोटा जनपदों के साथ-साथ अन्य राज्यों की करीब चार सौ गौशालाओं से देसी गाय का गोबर खरीदा जा रहा हैं।
इसी तरह तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश की 150 गौशालाओं से गोबर निर्यात हो रहा है। यहां भी उल्लेखनीय है कि एक एकड़ जमीन को जैविक भूमि बदलने के लिये करीब तीन हजार किलोग्राम गोबर की आवश्यकता होती है। बीसवीं पशु जनगणना के अनुसार राजस्थान राज्य में कुल पशुधन 568 मिलियन 5.68 करोड़ है। यह भारत में दूसरे स्थान पर है। इनमें 139 मिलियन 39 करोड़ गाय है वही प्रदेश में कुल 3525 रजिस्टर्ड गौशालाओं में 11 लाख 75 हजार 533 गोवंश है जबकि एक गाय चौबीस घंटे में करीब 8-10 किलो गोबर देती है। इस अनुपात से गौ शालाओं में 9 करोड़ 40 लाख 4264 किलो गोबर प्रतिदिन प्राप्त होता है।
इसी प्रकार केन्द्र व राज्य सरकारे यदि तेजी से काम करते हुए सरकारी गौशालाओं को खोले जाने सहित यदि निजी तौर पर अपनी भूमि पर गौशाला खोले जाने को प्रोत्साहन दे और आर्थिक मदद सरकार दे तो पूरे भारत वर्ष में बड़ी संख्या में गौशालाओं को खोलकर सीधे तौर पर जनता को रोजगार से जोड़ा सकता है। वही गौ माता को आस्था, श्रद्धा से जोड़कर सीधे तौर पर गौ मूत्र, गौ गोबर से जोड़कर गौ परख जीवन बनाने के लिये अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ प्रयासरत है और उपरोक्त जानकारी सहित अन्य सभी प्रस्ताव जो राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित होंगे उन्हें तत्काल केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों को भेजा जाएगा संभव हुआ तो केन्द्र व राज्यों सरकारों से अलग-अलग प्रतिनिधि मंडल स्वयं मिलकर वार्ता करेगा।
गाय हमारी माता है हम सबको इससे नाता है
- आज देश में अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ के सक्रिय होने से गौ हत्या पर अंकुश लगा है तथा संगठन के लोगों ने गौ हत्यारों को पकड़कर पुलिस के हवाले करते हुए गौ माता को आश्रय स्थल भिजवाने का काम किया है परन्तु फिर भी गौ हत्या को रोके जाने के लिये कठोर कानून बनाकर गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाए और गौ हत्या करने वाले को मृत्यु दंड का प्राविधान होना चाहिए।
- देश के विभिन्न राज्यो में बन रहे गौ आश्रय स्थलों कि देखभाल तथा गौ माता को मिलने वाली सुमुचित जीवन यापिका के लिये जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित हो जिसमें सामाजिक संगठनों व अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ के लोगों की भी सहभागिता हो ताकि पूरी पारदर्शिता के साथ गौ रक्षा, गौ सेवा हो सके।
- गौ माता हमारी सर्वोपरी श्रद्धा का केन्द्र तथा भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और देश का आर्थिक ढांचा गौ पालन पर निर्भर है। इसलिए ग्राम स्तर पर गौ शाला खोले जाने के लिये जन जागरण अभियान चलाने हेतु संगठन को सरकारें आर्शीवाद प्रदान करें और गौ पालकों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए गौ संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए।
- गौ मूत्र, गौ गोबर को रोजी रोटी से जोड़कर जन सहभागिता की जाए ताकि शुद्ध खेती हो सके और जनता को रोजगार से जोड़कर गौ रक्षा की जा सके।
- देश व राज्य सरकारें गौ सेवा आयोग में गौ सेवक नियुक्त करे ताकि जमीनी स्तर पर सीधे जन सहभागिता होकर गौ रक्षा की जा सके ।
गौ माता के लिये नीति और नीयत स्पष्ट करना होगा
- अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ जो कि संगठन की स्थापना से ही यह मांग करता आ रहा है कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाते हुए गौ हत्या करने वालों को मृत्युदंड का प्राविधान हो। ऐसे में इलाहाबाद हाईकोट के विद्वान न्यायमूर्ति का सुझाव सराहनीय है और केन्द्र सरकार को इस सुझाव को मानते हुए तत्काल कानून बनाकर गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा प्रदान करते हुए गौ हत्या करने वालों के विरूद्ध कडे कानून लागू करने चाहिए। क्योंकि माननीय न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव जी के द्वारा वैदिक, पौराणीक, सांस्कृतिक महत्व व सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने का सुझाव अति महत्वपूर्ण व सराहनीय है क्योंकि गौ माता भारतीय संस्कृति की धरोहर है। इसे धार्मिक नजरिये से नहीं बल्कि मां की तरह मानने की जरूरत है।
- गौ माता देश की आस्था और राष्ट्र धरोहर है इसे महजबी चश्मे से नहीं देखना चाहिए क्योंकि बहादुर शाह जफर के दौर में गौ हत्या करने मे गौ हत्या करने वालों को चौराहे पर खड़ा कर मृत्यु दंड दिया जाता था। वही अन्य मुगल शासको व महाराजा रणनीज सिंह के दौर पर मृत्यु दंड का प्राविधान था इसलिए गौ माता सबकी माता है। वही दारूल उलूम फिरंगी महल के द्वारा मी माता के सुझाव का समर्थन भी इस बात का प्रमाण है कि गौ हत्या पाप है। इसका साफ उदाहरण पवित्र कुरान में है कि गौ माता का दूध, घी दवा है और मास बीमारी है।
- अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ मांग करता है कि सभी धर्मों के लोग एक स्वर में मांग करें कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाया जाए और गौ रक्षा, सुरक्षा संवर्धन के लिये सभी देशवासी एक स्वर पर मांग करे साथ ही केन्द्र सरकार को कठोर
- निर्णय लेकर राज्य सरकारों को भी इस का पालन कराएं।
गौ संरक्षण क्यों जरूरी है?
गौ धन का अंत भारतीय वंश का अंत
गौ संरक्षण किये बिना हम भारतीय संस्कृति की रक्षा नहीं कर सकते क्योंकि जहां गौ माता हमारी आस्था श्रद्धा का प्रतीक है वही गौ मूत्र, गौ गोवर, गौ दूध, गौ घी जो स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है वही गौ गोबर से जैविक खेती कर हम स्वस्थ जीवन की कल्पना कम लागत में कर सकते हैं।
जैसा कि विदित है कि स्वस्थ गाय का वजन साढ़े तीन क्विंटल लगभग होता है और एक गाय प्रतिदिन 10 किलो गोबर, तीन लीटर गौ मूत्र देती है और एक किलो गोबर से 33 किलो खाद मिलती है जिसे जैविक खाद कहते है।
गौ गोबर से बनी जैविक खाद से लाभ
गौ गोबर में 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक
तत्व होते है इन सभी को कृषि भूमि की सख्त जरूरत है। उदाहरण के रूप मे मैग्नीज फॉस्फॉरस पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन कोबाल्ट, सिलिकॉन आदि ।
हवलेट पैकार्ड रासायनिक उर्वरको मे केवल तीन पोषक तत्व हो सकते है इसका मतलब है कि खाद रासायनिक खाद से छह गुना अधिक गुणकारी है। वही एक गाय का जीवन काल और धर्म ग्रन्थों मे भी है वही गाय के गोबर में लक्ष्मी होती है। तथा प्रतिदिन तीन लीटर गौ मूत्र देने वाली गौ माता के गौ मूत्र से 48 प्रकार के रोगो की दवाई बनती है। वही विदेशों मे गौ मूत्र का आयात हो रहा है तथा मधुमेह सहित भयंकर बिमारियों की दवाई बन रही है।
गौ माता जहां जीवन दायिनी है वही धन कुवेट भी है। एक गाय सालाना 11 लाख कमाती है यानी 20 साल के जीवन मे दो करोड़ बीस लाख रुपये हमें प्राप्त होते है, वही गाय के गोबर से मिथेन गैस भी बनती है जो घरेलु सिलेंडर जैसा होता है। जिस प्रकार एल पी जी पर चार पहिया वाहन चल सकता है। इसकी कीमत 50 से 60 पैसे प्रति किलोमीटर होती है और मीथेन पर चलने वाली गाड़ी से धुआँ भी नही निकलता है जो शुद्ध वातावरण व प्रदूषण मुक्त है। यहां यह भी उल्लेखनीय है। कि भारत मे 17 करोड़ गाय है इनका गोबर इकठ्ठा किया जाए तो देश को एक लाख 32 हजार करोड़ की बचत होगी। हमे मिलकर गाय को बचाना है तभी देश बचेगा और हम आर्थिक लाभ अर्जित करेगें।
– कलीम भारतीय
गौ सेवा हेतु आपका सहयोग
अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ द्वारा संचालित सभी सेवा-कार्य केवल आपके सहयोग से संभव हैं। आपका दिया गया प्रत्येक दान—
⭐ बीमार/अनाथ गायों की देखभाल ⭐ चारे ⭐चिकित्सा ⭐आश्रय एवं सेवा कार्यक्रमों में उपयोग किया जाता है। 🙏🌼